बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या
बिन तुम्हारे कभी नहीं आयी
क्या मेरी नींद भी तुम्हारी है
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या
बिन तुम्हारे कभी नहीं आयी
क्या मेरी नींद भी तुम्हारी है
उस से भी अब कोई बात क्या करना
ख़ुद से भी बात कीजे कम-कम जी
मैं ख़ुद नहीं हूं और कोई है मेरे अंदर
जो तुम को तरसता है, अब भी आ जाओ
ख़ुद से भी बात कीजे कम-कम जी
मैं ख़ुद नहीं हूं और कोई है मेरे अंदर
जो तुम को तरसता है, अब भी आ जाओ
कोई नहीं यहां खामोश, कोई पुकारता नहीं
शहर में एक शोर है और कोई सदा नहीं
ख़ामोशी से अदा हो रस्मे-दूरी
कोई हंगामा बरपा क्यूं करें हम
शहर में एक शोर है और कोई सदा नहीं
ख़ामोशी से अदा हो रस्मे-दूरी
कोई हंगामा बरपा क्यूं करें हम
हरिक हालत के बैरि हैं ये लम्हे
किसी ग़म के भरोसे पर न रहियो
अब हमारा मकान किस का है
हम तो अपने मकां के थे ही नहीं
किसी ग़म के भरोसे पर न रहियो
अब हमारा मकान किस का है
हम तो अपने मकां के थे ही नहीं
जा रहे हो तो जाओ लेकिन अब
याद अपनी मुझे दिलाइयो मत
हम आंधियों के बन में किसी कारवां के थे
जाने कहां से आए थे, जाने कहां के थे
याद अपनी मुझे दिलाइयो मत
हम आंधियों के बन में किसी कारवां के थे
जाने कहां से आए थे, जाने कहां के थे
और तो हमने क्या किया अब तक
ये किया है कि दिन गुज़ारे हैं
मेरी जां अब ये सूरत है कि मुझ से
तेरी आदत छुड़ाई जा रही है
ये किया है कि दिन गुज़ारे हैं
मेरी जां अब ये सूरत है कि मुझ से
तेरी आदत छुड़ाई जा रही है
दिल जो दीवाना नहीं आख़िर को दीवाना भी था
भूलने पर उस को जब आया को पहचाना भी था
काम की बात मैंने की ही नहीं
ये मेरा तौरे-ज़िंदगी ही नहीं
भूलने पर उस को जब आया को पहचाना भी था
काम की बात मैंने की ही नहीं
ये मेरा तौरे-ज़िंदगी ही नहीं
कभी-कभी तो बहुत याद आने लगते हो
कि रूठते हो कभी और मनाने लगते हो
मैं अब हर शख़्स से उकता चुका हूं
फ़क़त कुछ दोस्त हैं, और दोस्त भी क्या
कि रूठते हो कभी और मनाने लगते हो
मैं अब हर शख़्स से उकता चुका हूं
फ़क़त कुछ दोस्त हैं, और दोस्त भी क्या
मेरा बेहद ख़याल कीजिएगा
तू भी चुप है मैं भी चुप हूं ये कैसी तन्हाई है
तेरे साथ तेरी याद आयी क्या तू सचमुच आयी है
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